PCOS का नया नाम PMOS क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और मैनेजमेंट का सही तरीका

PCOS का नया नाम PMOS क्या है?

जब से डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स ने PCOS का नाम बदलकर PMOS नाम रखा है, तब से महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर PCOS का नया नाम PMOS क्या है? और इन दोनों में क्या अंतर है? क्या यह कोई नई बीमारी है या सिर्फ नाम बदला है? अगर आपके मन में भी इस बदलाव को लेकर उलझन या कोई सवाल है, तो यह आर्टिकल सिर्फ आपके लिए है। एक हेल्थ कोच के नाते, इस लेख में मैं आपको PMOS से जुड़ी हर बारीक और सही जानकारी बेहद आसान शब्दों में दूंगा।

PMOS क्या है? (What is PMOS in Hindi)

PMOS महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या है। इसमें शरीर के हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे पीरियड्स, वजन, स्किन, बाल और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। PMOS सिर्फ अधिक वजन वाली महिलाओं को नहीं होता, बल्कि दुबली पतली महिलाओं को भी हो सकता है

नए नाम का मतलब क्या है?

Poly + Endocrine — मतलब शरीर के कई हार्मोन सिस्टम एक साथ प्रभावित होते हैं।

Metabolic — मतलब यह बीमारी वज़न, इंसुलिन और मेटाबॉलिज्म से गहराई से जुड़ी है।

Ovarian Syndrome — इसका असर महिलाओं की Ovary और पीरियड्स पर भी पड़ता है।

PCOS से PMOS – नाम क्यों बदला गया?

पुराने नाम PCOS में केवल अंडाशय की सिस्ट का उल्लेख था, लेकिन विशेषज्ञों ने पाया कि यह समस्या केवल अंडाशय तक सीमित नहीं है। इसमें हार्मोन, मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन प्रतिरोध, हृदय स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य सभी प्रभावित होते हैं। इसीलिए नया नाम PMOS अधिक सत्य और व्यापक है। साथ ही, कई महिलाओं के अंडाशय में सिस्ट नहीं होते हुए भी यह समस्या हो सकती है।

 PCOS और PMOS में मुख्य अंतर क्या है?

पुराना नाम (PCOS): पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

नया नाम (PMOS): Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome (PMOS)

2. बीमारी का मुख्य केंद्र:

pcos: माना जाता था कि यह सिर्फ महिलाओं के अंडाशय (Ovary) की समस्या है।

pmos: अब माना गया है कि यह मुख्य रूप से खराब मेटाबॉलिज्म (भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) की गड़बड़ी है।

3. ओवरी में सिस्ट (गांठें):

pcos: डॉक्टरों का मानना था कि ओवरी में गांठें (सिस्ट) होना ही जरूरी है।

pmos: नई रिसर्च कहती है कि शरीर में बिना गांठें बने भी यह समस्या हो सकती है।

4. पेट की चर्बी और मोटापा:

pcos: वजन बढ़ने को सिर्फ इस बीमारी का एक आम लक्षण माना जाता था।

pmos: इंसुलिन रेजिस्टेंस और पेट के निचले हिस्से का मोटापा (Belly Fat) ही इस बीमारी की असली जड़ है।

5. इलाज का तरीका:

pcos: पूरा ध्यान सिर्फ पीरियड्स नियमित करने और दवाइयों (हार्मोनल पिल्स) पर होता था।

pmos: अब पूरा ध्यान मेटाबॉलिक हेल्थ को ठीक करने, सही न्यूट्रिशन और कसरत पर दिया जाता है।

इलाज का तरीका,पहले पूरा ध्यान सिर्फ पीरियड्स नियमित करने और दवाइयों (Hormonal Pills) पर होता था।,”अब पूरा ध्यान मेटाबॉलिक हेल्थ, सही डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल पर दिया जाता है।                                                             

PMOS में शरीर में क्या होता है?

  • अंडाशय अतिरिक्त मात्रा में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) उत्पन्न करते हैं
  • पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या बंद भी हो सकता हैं
  • गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है
  • इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है (इंसुलिन रेजिस्टेंस)
  • मधुमेह और हृदय रोग समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ता      

PMOS के मुख्य लक्षण     

अनियमित पीरियड्स: PMOS का सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड्स का समय पर न आना। कभी 3-6 महीने का गैप, तो कभी साल भर तक पीरियड्स नहीं आते। कुछ महिलाओं में पीरियड्स पूरी तरह से बंद भी हो सकते

2. चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल – एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता से दाढ़ी, चेहरे, छाती, पेट और पीठ पर पुरुषों जैसे बाल उगने लगते हैं।

3. चेहरे पर मुहांसे – PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कारण चेहरे पर अधिक मात्रा में मुहांसे होने लगते हैं, जो सामान्य मुहांसों से अधिक गंभीर होते हैं। त्वचा तैलीय और रुखी हो सकती है।

4. वजन में बदलाव

  • लगभग 70% महिलाओं में वजन अचानक बढ़ना शुरू हो जाता है
  • कुछ महिलाओं में वजन कम भी हो सकता है
  • पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा होने लगती है
  • 5. बेली फैट और लव हैंडल
  • सामान्य मोटापे में हिप्स और थाइज में फैट जमा होता है
  • लेकिन PCOS में पेट के आसपास फैट जमा होता है
  • लव हैंडल (कमर के दोनों तरफ चर्बी) बढ़ जाते हैं
  • हिप्स का साइज कम हो जाता है

6. बालों का झड़ना– सिर के बाल पतले होने लगते हैं और तेजी से झड़ने लगते हैं।

7. आवाज में भारीपन -पुरुष हार्मोन की अधिकता के कारण आवाज भारी और मोटी हो सकती है।

8. यौन इच्छा में कमी – हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं में यौन इच्छा कम हो जाती है।

9. त्वचा का रंग बदलना– गर्दन, बगल और कमर के नीचे त्वचा का रंग काला और मोटा हो सकता है, जो इंसुलिन प्रतिरोध की निशानी होती है।

10. थकान और कमजोरी– इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण महिलाओं को लगातार थकान महसूस होती है।

11. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव– ज्यादा तनाव, चिंता, उदासी और मूड स्विंग्स PMOS के साथ जुड़े हो सकते हैं।

PMOS होने के प्रमुख कारण

  1. इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ने से अंडाशय प्रभावित होती और सामान्य से अधिक मात्रा में एंड्रोजन बनाते हैं। यह PMOS का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जाता है।
  • जेनेटिक: PMOS होने के एक कारण जेनेटिक भी सकता है, अगर परिवार में मां या बहन को यह समस्या है, तो ऐसे स्तिथि में pmos होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • खराब जीवनशैली:  ख़राब जीवनशैली कई बीमारी होने का कारण होती है, pmos होने के प्रमुख कारणों में से एक है ख़राब जीवनशैली, देर रात तक जागना, अपर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि की कमी और tv, मोबाइल स्क्रीन का अधिक उपयोग या सभी pmos होने के कारण है
  • हाई प्रोसेस्ड जंक फ़ूड का सेवन: हाइ प्रोसेस्ड जंक फूड. रिफाइंड शुगर और मैदा वाले खाद्य पदार्थ।
  • अत्यधिक तनाव: यह कहा भी जाता है की चिंता चीता के समान होती है, ज्यादा तनाव लेने से यह   हार्मोनल असंतुलन को और बढ़ाता है।
  • मोटापा: BMI 27 से अधिक होने पर PMOS का जोखिम काफी बढ़ जाता है , लेकिन ओबिस महिला के साथ ही दुबली पतली महिलाओं में भी pmos के लक्षण पाए जाते है
  • शरीर में हल्की सूजन (Low-grade inflammation): यह एंड्रोजन उत्पादन को बढ़ा सकती है।
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PMOS डाइट: क्या खाएं और क्या न खाएं

क्या खाएं (सहायक आहार)

  • उच्च प्रोटीन: अंडे, चिकन, मछली, पनीर, दालें – वजन नियंत्रण और इंसुलिन संतुलन दोनों के लिए जरूरी
  • हरी सब्जियां: पालक, मेथी, लौकी, ब्रोकली, शिमला मिर्च – फाइबर से भरपूर
  • फल: अनार, सेब, अमरूद, संतरा, पपीता – इंसुलिन स्तर संतुलित रखते हैं
  • स्वस्थ फैट: अखरोट, बादाम, तिल, ओलिव ऑयल, घी (सीमित मात्रा में)
  • Omega-3: मछली, अलसी के बीज, चिया सीड्स – हार्मोन संतुलन और सूजन कम करने में सहायक
  • साबुत अनाज: ओट्स, ब्राउन राइस, क्विनोआ, मूंग-मसूर दाल
  • पानी: रोजाना 3-4 लीटर, नारियल पानी, नींबू पानी, हरी चाय (बिना शक्कर)

क्या न खाएं

  • हाइ प्रोसेस्ड जंक फूड
  • रिफाइंड शुगर, मिठाईयां और सफेद मैदा वाले खाद्य पदार्थ
  • कोल्ड ड्रिंक्स, सोडा और पैकेट बंद खाद्य पदार्थ
  • अत्यधिक तला-भुना भोजन
PMOS का घरेलू उपचार: Self Care से कैसे करें देखभाल?
1. जीवनशैली में बदलाव करें
  • समय पर सोना और जागना – रोजाना कम से कम 7-8 घंटे नींद लें
  • तनाव कम करने के लिए ध्यान और प्राणायाम करें
  • स्क्रीन टाइम कम करें और अपने शौक तथा रुचियों को समय दें
2. रोज वर्कआउट करें
  • योग: हर रोज 30-45 मिनट योग करें
  • प्राणायाम: कपालभाति, अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम
  • एक्सरसाइज: कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों शामिल करें
  • वॉकिंग: रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चलें

3. वजन नियंत्रित रखें

PMOS को नियंत्रित करने के लिए वजन कम करना सबसे महत्वपूर्ण है। वजन कम होने से अंडाशय पर जमी चर्बी घटती है, हार्मोन संतुलित होते हैं और अंडे सही तरीके से रिलीज होने लगते हैं।

किनसे मिलें?

निम्नलिखित विशेषज्ञों से संपर्क करें:

  • एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (Endocrinologist)
  • गायनेकोलॉजिस्ट (Gynaecologist)
  • न्यूट्रिशनिस्ट (Nutritionist)
  • GYM TRAINER

नियमित जांच:

  • हर 3-6 महीने में हेल्थ चेकअप कराएं
  • हार्मोन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और ब्लड शुगर जांच कराएं
  • अपने ब्लड ग्रुप और जांचों के आधार पर डाइट प्लान बनवाएं

निष्कर्ष

PMOS एक गंभीर समस्या है, लेकिन सही जीवनशैली और आहार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। याद रखें:

  1. नियमित व्यायाम
  2. संतुलित आहार
  3. पर्याप्त नींद
  4. तनाव प्रबंधन
  5. नियमित मेडिकल जांच

PMOS से लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन सही दिशा में किए गए प्रयासों से निश्चित रूप से सफलता मिलती है। अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और आज से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

FAQ

PMOS के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. PMOS और PCOS में क्या फर्क है?     

उत्तर: PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) का पुराना नाम था जो सिर्फ अंडाशय की सिस्ट पर focus करता था। PMOS (Poly-endocrine Metabolic Ovarian Syndrome) नया नाम है जो यह बताता है कि यह समस्या सिर्फ अंडाशय तक नहीं, बल्कि पूरे हार्मोनल सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन से जुड़ी है।

Q2. क्या PMOS पूरी तरह ठीक हो सकता है?

उत्तर: PMOS को पूरी तरह ‘cure’ नहीं किया जा सकता, लेकिन सही डाइट, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन से इसे बहुत हद तक control किया जा सकता है। कई महिलाओं में lifestyle changes से पीरियड्स नियमित हो जाते हैं और लक्षण काफी कम हो जाते हैं।

Q3. PMOS का diagnosis कैसे होता है?

उत्तर: PMOS के diagnosis के लिए डॉक्टर आमतौर पर Hormone test (LH, FSH, testosterone, insulin), Pelvic Ultrasound और Blood sugar test कराते हैं। Rotterdam Criteria के अनुसार — अनियमित पीरियड्स, अधिक एंड्रोजन हार्मोन और अल्ट्रासाउंड पर सिस्ट — इनमें से 2 होने पर PMOS confirm होता है।

Q4. क्या दुबली-पतली महिलाओं को भी PMOS हो सकता है?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। PMOS सिर्फ मोटी महिलाओं को नहीं होता। लगभग 20-30% PMOS cases में महिलाओं का वजन सामान्य या कम होता है। इसे ‘Lean PMOS’ कहते हैं। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन मोटापे के बिना भी हो सकता है।

Q5. PMOS में pregnancy possible है?

उत्तर: हाँ, PMOS होने पर pregnancy मुश्किल हो सकती है लेकिन असंभव नहीं। सही lifestyle, वजन नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर Fertility treatment से गर्भधारण संभव है। एक Gynecologist से समय पर मिलना जरूरी है।

Q6. PMOS में कौन सी diet best है?

उत्तर: PMOS में Low Glycemic Index (Low GI) diet सबसे बेहतर मानी जाती है। इसमें High Protein (अंडे, दाल, पनीर), Omega-3 (मछली, अलसी), हरी सब्जियाँ और साबुत अनाज शामिल करें। Refined sugar, मैदा, junk food और cold drinks से बचें। Insulin levels को stable रखना PMOS management की सबसे बड़ी कुंजी है।

Q7. PMOS की जाँच के लिए किस डॉक्टर से मिलें?

उत्तर: PMOS के लिए पहले Gynecologist (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से मिलें। अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस या thyroid की समस्या हो तो Endocrinologist से भी मिलना जरूरी है। Diet और lifestyle के लिए एक certified Nutritionist की मदद लें।

Q8. क्या PMOS में periods बंद हो जाते हैं?

उत्तर: PMOS में periods अनियमित हो जाते हैं — कभी 2-3 महीने का गैप, कभी बहुत कम bleeding, और कुछ cases में periods कई महीनों तक बंद भी हो सकते हैं (इसे Amenorrhea कहते हैं)। यह insulin और androgen hormones के असंतुलन की वजह से होता है।

PCOS का नाम बदलकर PMOS क्यों रखा गया? जानिए पूरी जानकारी

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अस्वीकृति: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। PMOS के इलाज के लिए कृपया योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। प्रत्येक महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए व्यक्तिगत सलाह लेना यदि आप अपने ब्लड ग्रुप और बॉडी टाइप के अनुसार कस्टमाइज्ड PMOS डाइट और वर्कआउट प्लान चाहते हैं, तो हमारे ऑनलाइन हेल्थ कोचिंग प्रोग्राम से जुड़ सकते हैं।” यह आर्टिकल आपके ब्लॉग fitnessvani.com के पाठकों को बिल्कुल सटीक और अप-टू-डेट

PCOS का नया नाम PMOS क्या है?

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